हम सूचना प्रौद्योगिकी (आई टी) क्रांत‍ि के युग में रहते हैं । विकास की प्रक्रिया में तेजी व बदलाव लाने, विशेष रुप से अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने में सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति की सार्वभौमिक स्वीकृति निर्विवाद है । संचार प्रौद्योगिकियों विशेष रुप से इंटरनेट में तेजी से होने वाली उन्नति से सरकार विश्वभर में अल्प सुविधा संपन्न नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाकर उनके अधिकांश दूरस्थ निर्वाचन क्षेत्रों तक पहुँचने में सक्षम हुई है ।

रा.सू.वि.केन्द्र, भारत सरकार का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक प्रमुख वैज्ञानिकी व तकनीकी संगठन है जो सरकार में सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समाधानों के कार्यान्वयन तथा उनके सक्रिय संवर्धन में सबसे आगे है । रा.सू.वि.केन्द्र ने पिछले तीन दशकों से देश-भर में ई-शासन अभियान चलाने के लिए, जिनके पास सुविधाऍं पहुँच नहीं पाती, उन तक सुविधाओं को पहुँचाने के उद्देश्‍य से सरकार के प्रयासों में सहायता करने तथा बेहतर व अत्‍यधिक पारदर्शी शासन प्रदान करने हेतु मजबूत नींव बनाने के लिए नेतृत्‍व किया है ।

भूमिका

भारत में 1970 के मध्यस में जल-संभरण (वाटरशेड) वर्षों में शासन में क्रांतिकारी परिवर्तन करने की घोषणा की गयी । वर्ष 1975 में भारत सरकार ने सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी (आई टी) का अनुकूल इस्ते्माल करने हेतु कार्यनीति तैयार की जिससे शासन को अत्यआधिक पारदर्शी व प्रभावोत्पामदक बनाकर समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके । 1976 में आई टी की शक्तिा को स्वी कार करते हुए सरकार ने स्थाअयी महत्वा की एक परियोजना अर्थात् “राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र” की शुरुआत की । उसके पश्चात् यूएस $ 4.4 मिलियन की संयुक्तभ राष्ट्र् विकास कार्यक्रम (यू एन डी पी) की वित्तीतय सहायता से राष्ट्री य सूचना-विज्ञान केन्द्र् की स्थावपना की गई ।

उपलब्धियॉं

  • राष्ट्री य सूचना-विज्ञान केन्द्र् ने केन्द्रौ सरकार, राज्यै सरकारों, संघ शासित राज्य् क्षेत्र के प्रशासनों, जिलों व अन्य सरकारी निकायों को ई-शासन हेतु प्रभावी सहायता तथा सुदृढ़ संचार आधार प्रदान करने के लिए आई सी टी को उभारा है । यह आई सी टी सेवाओं की एक व्याापक श्रृंखला प्रदान करता है । इसमें निकनेट, भारत सरकार के लगभग 53 विभागों में गेटवे नोड्स की सुविधा रखने वाले एक राष्ट्राव्यातपी संचार नेटवर्क, सेवा आई सी टी अनुप्रयोगों के लिए 36 राज्यह/राज्यक शासित क्षेत्र के सचिवालय तथा 688 जिला कलक्टोरेट शामिल हैं । निकनेट ने विकेन्द्रीलकृत आयोजना, सरकारी सेवाओं में सुधार लाने, राष्ट्रीय व स्थानीय सरकारों की व्याकपक पारदर्शिता व लोगों के प्रति उनकी जवाबदेही निभाने में प्रमुख भूमिका अदा की है । केन्द्रद तथा राज्यच सरकारों के निकट सहयोग से रा.सू.वि.केन्द्रि आई सी टी परियोजनाओं के कार्यान्वचयन में सहायता प्रदान करता है तथा आई सी टी के सभी क्षेत्रों में इसके प्रयोक्ताथओं हेतु अत्याेधुनिक प्रौद्योगिकी की उपलब्धभता को सुनिश्चि त करने का प्रयास करता है ।

राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्रन के आई सी टी आधारित प्रयासों ने कई वर्षों से मील के पत्थगर के समान कार्य करते हुए जिन उम्मीसदों के साथ इसकी स्थापना की गयी थी उन अपेक्षाओं को इसने पूरा किया है जिसे नीचे दिये गए अनुसार देखा जा सकता है :

मील का पत्थइर (Milestones)

  • पॉंचवी योजना अवधि (अर्थात् 1972-77) के दौरान केन्द्रा सरकार के विभागों में अंकीय विभाजन को दूर करने हेतु केन्द्रा सरकार के सूचना-विज्ञान विकास कार्यक्रम ने एक सामरिक निर्णय लिया ।
  • निकनेट - 1980 तथा 1990 के दौरान केन्द्रा सरकार के मंत्रालयों तथा विभागों में संसाधनों की भागेदारी तथा इंटरनेट/इंटरानेट पहुँच हेतु अत्याटधुनिक वीसैट प्रौद्योगिकी का इस्तेनमाल करने वाला विकासशील देशों में इस तरह का पहला निकनेट है ।
  • जन प्रशासन व सामाजिक अनुप्रयोगों में सूचना प्रौद्योगिकी
  • सातवीं योजना अवधि (अर्थात् 1985-1990) के दौरान केन्द्र् तथा राज्या सरकारों/संघ-राज्या क्षेत्र के प्रशासनों में अंकीय विभाजन पर काबू पाने के लिए राज्यर सरकार के सूचना-विज्ञान विकास कार्यक्रम का सामरिक निर्णय लिया ।
  • जिला प्रशासनों में अंकीय विभाजन पर काबू पाने के लिए 1985 में डिसनिक एक निकनेट आधारित जिला सूचना-विज्ञान कार्यक्रम का एक सामरिक निर्णय लिया ।
  • इंटरनेट प्रौद्योगिकी के आगमन से पहले 1985-1990 के दौरान यह भारत में देश के सभी जिलों, जो कि विविधता का देश है जिसके विभिन्नर प्रकार के भू-भाग हैं, विभिन्न प्रकार की कृषि विषयक जलवायु की स्थि तियॉं, विभिन्नख स्तोर की सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ तथा विभिन्न स्तरों का क्षेत्रीय विकास आदि की परिस्थि तियॉं वाले भागों में भी पहुँच रहा है ।
  • वीडियो कांफ्रेंसिंग प्रचालन कार्यों की सर्वप्रथम शुरुआत सन् 1990 से पूर्व हुई तथा अब इसे 490 स्थाथनों के साथ जोड़ा गया है ।
  • नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर सर्विसिज़ इंक (निकसी) की स्थापना राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र के अधीन धारा 25 कंपनी के रुप में की गयी । निकसी को सूचना प्रौद्योगिकी समाधानों तथा सेवाओं की सम्पूर्ण श्रेणी की आउटसोर्सिग करने हेतु सरकारी विभागों द्वारा वरीयता दी जाती है ।
  • इंडिया इमेज पोर्टल भारतीय सरकारी सूचना का एक गेटवे है जिसका उद्देश्य सरकारी मंत्रालयों तथा विभागों को व्यापक WWW सेवाओं को प्रदान करना है । इस परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार की 5000 से भी अधिक वेबसाइट होस्ट की जा रही हैं ।
  • इंडिया इमेज पोर्टल का महत्वपूर्ण परिणाम जो सहस्त्राब्दी के प्रारंभिक वर्षों में आया, वह भारत सरकार की निर्देशिका है जो अपने तरह की सर्वप्रथम व्यापक निर्देशिका है जो सभी स्तरों पर भारत सरकार की वेबसाइटों के बारे में सूचना प्रदान करती है ।
  • इसके साथ ही वर्ष 2005 के बाद इंडिया इमेज पोर्टल में सभी सेवाओं तथा वेबसाइटों को शहरियों को सिंगल-विंडो पहुँच की सुविधा प्रदान करने के लिए एक इंटरफेस के अंतर्गत लाया गया । यह राष्ट्रीय पोर्टल http://india.gov.in पर उपलब्ध है ।
  • एकीकृत नेटवर्क प्रचालन केन्द्र (आईएनओसी) को 2002 में देश में सभी वॉन लिंको की हर समय निगरानी करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था ।
  • राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र का डॉटा केन्द्र वर्ष 2002 में स्थापित किया गया जो लगभग 5000 वेबसाइटों तथा पोर्टलों को होस्ट करता है । डॉटा केन्द्र जो उनकी स्थानीय भंडारण आवश्यकताओं के लिए राज्य की राजधानियों में स्थापित किये गये हैं उनमें 2-10 टेरा बाइट्स की भंडारण क्षमता है । राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र को वर्ष 2002 में शुरु की गयी सी ए सेवाओं तथा जी2जी डोमेन में प्रमाणन प्राधिकरण (सी ए) के रुप में कार्य करने के लिए लाइसेंस दिया गया है ।
  • राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र को वर्ष 2002 में शुरु की गयी सी ए सेवाओं तथा जी2जी डोमेन में प्रमाणन प्राधिकरण (सी ए) के रुप में कार्य करने के लिए लाइसेंस दिया गया है ।
  • एन आई सी ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 का तीव्र गति से तथा उसका प्रभावी कार्यान्वयन करने हेतु सरकार को सहायता प्रदान करने के लिए सूचना के अधिकार पोर्टल की स्थापना की ।
  • कुछ वर्षों में रासूविकेन्द्र ने केन्द्र सरकार के सभी कार्यालयों तथा राज्य सरकार के सचिवालयों में 3000 से भी अधिक नोडो वाले उपग्रह आधारित व्यापक क्षेत्र के नेटवर्क तथा स्थानीय क्षेत्र के नेटवर्क के 60,000 से अधिक नोडो का विस्तार किया है ।

ई-शासन लागू करने के एक प्रमुख कदम के रुप में एन आई सी एतद्द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा यथा घोषित निम्नलिखित न्यूनतम कार्यसूची को कार्यान्वित करता है:

  • इंटरनेट/इंटरानेट अवसंरचना (पर्सनल कम्प्यूटर, ऑफिस उत्पादकता उपस्कर, कार्य-आवंटन तथा कार्यालय पद्धतियों पर पोर्टल)
  • प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों/पदाधिकारियों का आई टी सशक्तिकरण
  • जी2जी, जी2बी, जी2सी, जी2ई पोर्टलों को शामिल करते हुए आई टी समर्थित सेवायें क्षेत्रीय विकास हेतु आई टी योजनायें
  • IT Plans for Sectoral Development
  • पुन:इंजीनियरिंग कार्य प्रक्रिया

रासूविकेन्द्र नीचे वर्णित आईसीटी सेवाओं की एक समृद्ध व विविध सेवाएं प्रदान करता है:

वर्तमान सेवाओं की रुपरेखा:

  • अंकीय संग्रह व प्रबंधन
  • अंकीय पुस्तकालय
  • ई-वाणिज्य
  • ई-शासन
  • भौगोलिक सूचना प्रणाली
  • सरकारी कर्मचारियों हेतु आई टी प्रशिक्षण
  • नेटवर्क सेवायें (इंटरनेट, इंटरानेट)
  • वीडियो कांफ्रेंसिंग
  • वेब सेवायें
  • सामान्य सूचना-विज्ञान सेवायें
  • चिकित्सा सूचना-विज्ञान
  • ग्रंथ-सूची सेवायें
  • बौद्धिक संपदा तथा सामान्य जानकारी सूचना-विज्ञान सेवायें
  • डॉटा केन्द्रों की स्थापना
  • गिगाबाइट आधार का विनिर्माण
  • आई टी परामर्शदायी सेवायें
  • सद्य:परिचालित आई टी समाधान

चूँक‍ि भारत सरकार, सरकारी कार्यकलापों के विभिन्न स्तरों पर ई-शासन को कार्यान्वित कर रही है, एन आई सी आवश्यक पी के आई प्लेटफार्म प्रदान कर एक मुख्य भूमिका निभा रहा है । देश में एक नोड्ल आई टी संगठन होने के नाते राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र ने मई, 2003 में एन आई सी मुख्यालय में प्रमाणन प्राधिकरण की प्रतिष्ठापना की है, जिसमें जीव-सांख्यिकी सेंसर से पूर्ण अत्याधुनिक सुरक्षित अवसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय मानकों की निगरानी प्रणाली शामिल है । प्रमाणन प्राधिकरण (सी ए) एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी या एक सत्ता है जिसे प्रमाणन प्राधिकरण नियंत्रक (सीसीए) जो पहचान की संपुष्टि और अंकीय हस्ताक्षर प्रमाणपत्रों को जारी करने के लिए देश में प्रमाणन प्राधिकारियों के लिए शीर्ष विनियामक निकाय है, द्वारा लाइसेंस प्रदान किया गया है । एन आई सी ने उसी के प्रचालन के लिए अत्यंत दक्ष और प्रशिक्षित जनशक्ति को तैनात किया है और उत्कृष्ट लोजिस्टिक सहायता प्रदान की है ।

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